Basic Electrical Theory In Hindi

Electricity, Energy का ही एक रूप है हम Electricity का उपयोग बहुत सी जगह पर करते हैं जैसे घरो के अन्दर Lighting में, खाना बनाने में, फैक्ट्री में और देनिक जीवन में बहुत सी जगह हम Electricity का उपयोग करते हैं। Electricity की प्रकृति जानने के लिए हमें पर्दाथ की संरचना के बारे में जानना होगा, इस संसार में सभी पदार्थ छोटे कण(Particle) से मिलकर बना है जिन्हें हम अणुओं(Molecule) के नाम से जानते हैं। आपको में बताना चाहूँगा की किसी पदार्थ के अणु में उस पदार्थ की सभी गुण होते हैं। अणु भी छोटे छोटे कणों से मिलकर बना होता है जिसे हम परमाणु(Atoms) कहेते हैं। परमाणु किसी पदार्थ का सबसे छोटा कण होता है जो अस्तित्व में हो सकता है।

पदार्थ(Matter)

जिसका कोई निश्चित भार होता है और जो स्थान घेरता है। हमारी पृथ्वी पर पदार्थ तीन रूपों में पाया जाता है।

ठोस(Solid): ठोस का निश्चित भाग आयतन तथा आकार होता है सामान्य तापमान को सोना, लोहा आदि ठोस होते हैं

द्रव(Liquid): जिसका निश्चित भार और आयतन तो होता है लेकिन जिसका निश्चित आकार नहीं होता अथात जब हम द्रव को किसी पात्र में डालते हैं तो वह उस पात्र के समान आकार ग्रहण कर लेता है। द्रव के उदाहरण जल, पारा आदि हैं।

गैस(Gas): गैस का निश्चित भार होता है, लेकिन इसका निश्चित आयतन और आकार नहीं होता है यह जिस पात्र में भरी जाती है उसी का आयतन तथा आकार ग्रहण कर लेती है सामान्य तापमान पर हाइड्रोजन ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड आदि गैस होती हैं।

Element (तत्व): वो पदार्थ जिनके अणु समान परमाणु से मिलकर बने होते है उन्हें हम Element (तत्व) कहेते हैं।

Compound (यौगिक): वो पदार्थ जिनके अणु अलग परमाणु से मिलकर बने होते है उन्हें हम Compound (यौगिक) कहेते हैं।

मिश्रण (Mixer): दो या दो से अधिक प्रकार के पदार्थों को एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है, पदार्थों के  मिलाने से बने पदार्थ मिश्रण कहेलाते है।

ध्यान देने वाली बात यह है की मिश्रण के अवयवों को भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जाता है जबकि यौगिकों के अवयवों को रासायनिक विधियों से ही पृथक किया जा सकता है।

Electricity की अवधारणा हम पदार्थों के परमाणु संरचना से प्राप्त कर सकते हैं।

परमाणु संरचना(Atomic Structure)

जैसा की मैंने ऊपर बताया कि किसी पदार्थ का सूक्ष्मतम कण परमाणु होता है लेकिन परमाणु भी सबसे छोटा कण नहीं है। यह भी मुख्य प्रोटोन न्यूट्रॉन तथा इलेक्ट्रान से मिलकर बना होता है। मैं आपको बताना चाहूंगा परमाणु की संरचना हमारे सौरमंडल से मिलती-जुलती होती है जिस तरह से सूर्य के चारों ओर ग्रह चक्कर लगाते हैं तथा सूर्य इन सबके केंद्र में होता है। उसी प्रकार प्रत्येक परमाणु में एक केंद्र होता है जिसे नाभिक कहते हैं। नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते रहते हैं। यह कक्षाएं दीर्घवृत्ताकार होती हैं।

नाभिक(Nucleus):  किसी परमाणु का केंद्रीय भाग नाभिक कहलाता है। इसमें प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन उपस्थित होते हैं। यह दोनों प्रकार के कण आन्तरा आणविक बल के द्वारा नाभिक में बंधे होते हैं। नाभिक के चारों ओर खाली स्थान होता है जहां बहुत से इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं नाभिक की खोज रदरफोर्ड की थी।

प्रोटोन(Protons):  यह नाभिक में उपस्थित होते हैं इनमे किसी प्रकार की गति नहीं होती है। एक प्रोटॉन पर + 1.602 × 10 – 19 कूलाम आवेश होता है जो धनावेशित होता है प्रोटोन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन की द्रव्यमान का 1845 गुना होता है। प्रोटॉन की खोज गोल्ड स्टीन ने की थी। नाभिक का आवेश प्रोटोन के आवेश के बराबर होता है।

इलेक्ट्रॉन(Electron): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर उपस्थित कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं एक इलेक्ट्रॉन पर – 1.602 × 10 – 19 कूलाम आवेश उपस्थित होता है जो ऋण आवेशित होता है। इलेक्ट्रॉन की खोज जे जे थॉमसन ने की थी

न्यूट्रॉन(Neutron): यह नाभिक में प्रोटोन के साथ उपस्थित होता है। न्यूट्रॉन आवेश रहित होता है। इसका द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है। 1.67×10-27 kg होता है। इसकी खोज जेम्स चैडविक ने की थी।

इलेक्ट्रॉन दो प्रकार से गति करता है पहली चक्रण गति गति तथा दूसरी कक्षीय गति इसमें चक्रण गति के अंतर्गत इलेक्ट्रॉन अपनी धुरी पर लट्टू की भांति घूमता रहता है और कक्षीय गति के अंतर्गत अपनी कक्षा में रहते हुए नाभिक के चारों चक्कर लगाता रहता है।

मुक्त इलेक्ट्रॉन(Free Electrons)

अधिकतर पर्दार्थ में परमाणु के बहार की कक्षा में एक या दो इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं । जब इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर उपस्थित होते हैं तो उन पर आकर्षण बल काम करता है। जो इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास स्थित होते हैं उन पर आकर्षण बल ज्यादा होता है तथा जो इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर की ओर उपस्थित होते हैं उन पर आकर्षण बल कम होता है। इसलिए नाभिक से दूर इलेक्ट्रॉन एक तरह से मुक्त अवस्था में होते हैं। इसलिए इन्हें मुक्त इलेक्ट्रॉन कहा जाता है। मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण ही धारा का प्रवाह वह पाता है।

धनायन(Cation) तथा ऋणायन(Anion)

सामान्य अवस्था में परमाणु एक उदासीन कण होता है। जब परमाणु को बाहर से ऊर्जा देकर उसमें एक या अधिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करा दिए जाते हैं तब परमाणु धनावेशित हो जाता है तथा इसे धनायन(Cation) कहते हैं । इसी प्रकार यदि इस परमाणु को एक या अधिक इलेक्ट्रॉन दे दिए जाते हैं तब यह ऋणावेसित हो जाता है तो इसे ऋणायन(Anion) कहते हैं।

सामान्य अवस्था में परमाणु में धनायन तथा ऋणायन समान होते हैं। यदि किसी क्रिया के फलस्वरुप परमाणु अतिरिक्त आवेश ग्रहण करता है। या अपना आवेश खो देता है तब यह उत्तेजित परमाणु कहलाता है।

आपको मैं बताना चाहूंगा की परमाणु आवेशों का आदान प्रदान इलेक्ट्रॉन के रुप में करता है या तो वह इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करेगा या इलेक्ट्रॉन को त्याग करेगा ।

इलेक्ट्रॉनों का आदान प्रदान मुक्त इलेक्ट्रॉनों के माध्यम से होता है क्योंकि मुक्त इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहरी कक्षा में उपस्थित होते हैं जिन पर आकर्षण बल कम लगता है।

कोई भी परमाणु उत्तेजित अवस्था में 10-10 सेकंड तक ही रह सकता है। इसके बाद वह पुनें अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाता है।

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मोहम्मद साजिद अंसारी
मेरा नाम मोहम्मद साजिद अंसारी है मै अभी M.Tech(Power System) का Student हूँ । मेने ये ब्लॉग उन सभी Students के लिए बनाया है, जो लोग इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स हैं और सरकारी एग्जाम की तैयारी कर रहें हैं । इसके आलावा आप इलेक्ट्रिकल फॉर हिंदी के YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें । नीचे दी गयी लिंक से ब्लॉग को सोशल मीडिया पर फॉलो करें ।

5 COMMENTS

  1. जल्द ही में यहाँ अपडेट करने बाला हूँ आप हमारे वेबसाइट को सब्सक्राइब करें जैसे ही न्यू पोस्ट आएगी आपके मेल पर पहुच जाएगी

    • aap book ko buy karke hi paden pdf padne me acha nahi lagta hai aap mere is blog ko subscribe karen yahan me update dalta rahunga

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